राज्यसभा चुनाव 2026 : 24 सीटों पर 18 जून को मतदान

राज्यसभा चुनाव 2026 : 24 सीटों पर 18 जून को मतदान

राज्यसभा चुनाव 2026 : 24 सीटों पर 18 जून को मतदान

राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव की तारीख तय हो गई है। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि 10 राज्यों में खाली हो रही इन सीटों के लिए 18 जून को मतदान होगा और उसी दिन शाम तक वोटों की गिनती पूरी कर ली जाएगी। जून-जुलाई में जिन सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनकी जगह नए सदस्य चुने जाएंगे।

🔑 चुनाव का महत्व

  • राज्यसभा में बहुमत आने वाले समय की राजनीति और बड़े विधायी फैसलों के लिए अहम माना जाता है।
  • फिलहाल बीजेपी के पास 113 सदस्य हैं, जबकि एनडीए का कुल आंकड़ा 148 है।
  • दो-तिहाई बहुमत (164 सदस्य) की जरूरत होती है, जिससे संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित हो सके। एनडीए अभी इस आंकड़े से दूर है।

⚖️ वोटिंग प्रक्रिया

  • राज्यसभा चुनाव में जनता सीधे वोट नहीं डालती, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं।
  • चुनाव सिंगल ट्रांसफरेबल वोट और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होता है।
  • हर दो साल बाद एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं, इसलिए राज्यसभा कभी भंग नहीं होती और इसे स्थायी सदन कहा जाता है।

📊 राज्यों का समीकरण

  • कर्नाटक : कांग्रेस मजबूत, दो सीटें निकाल सकती है।
  • आंध्र प्रदेश : NDA का पलड़ा भारी, चारों सीटें मिलने की संभावना।
  • गुजरात : बीजेपी की साफ बढ़त, कांग्रेस मुश्किल में।
  • राजस्थान : संतुलन कायम, बीजेपी दो और कांग्रेस एक सीट बरकरार रख सकती है।
  • मध्य प्रदेश : बीजेपी दो और कांग्रेस एक सीट, तीसरी पर रणनीतिक दांव संभव।
  • झारखंड : सबसे दिलचस्प मुकाबला, INDIA गठबंधन मजबूत लेकिन NDA क्रॉस वोटिंग से कोशिश करेगा।

🧮 रणनीति और चुनौतियां

  • पार्टियां जीत का कोटा निकालकर विधायकों को अलग-अलग उम्मीदवारों में बांटती हैं।
  • सबसे बड़ा खतरा क्रॉस वोटिंग का होता है। इसे रोकने के लिए 2003 से ओपन बैलेट सिस्टम लागू है।

👥 बड़े नेताओं का कार्यकाल खत्म

इस बार जिन नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें शामिल हैं:

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे
  • पूर्व प्रधानमंत्री और जेडी(एस) नेता एच.डी. देवगौड़ा
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह
  • केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू
  • गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष शक्तिसिंह गोहिल

यह चुनाव न सिर्फ संख्याओं का खेल है, बल्कि रणनीति, अनुशासन और आखिरी वक्त की राजनीतिक चालों की भी बड़ी परीक्षा है।

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